यदि बीमा लेने के बाद बीमारी का पता चले तो जीवन बीमा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
मंगलवार 24 फ़र 2026

अक्सर लोगों को डर होता है कि यदि पॉलिसी लेने के बाद कोई गंभीर बीमारी सामने आ जाए तो बीमा कंपनी पॉलिसी रद्द कर देगी।
भारत में सामान्य नियम यह है:
यदि आपने पॉलिसी लेते समय अपने स्वास्थ्य की जानकारी ईमानदारी से दी थी, तो बीमारी बाद में आने पर आपकी मुख्य जीवन बीमा कवरेज जारी रहती है।
बीमा कंपनी किन बातों की जांच करती है?
जब बीमारी का निदान पॉलिसी लेने के बाद होता है, तो बीमा कंपनी निम्नलिखित बातों की समीक्षा करती है:
- प्रस्ताव फॉर्म में दी गई स्वास्थ्य जानकारी
- बीमारी की वास्तविक शुरुआत की तिथि
- पॉलिसी का प्रकार (टर्म प्लान, होल लाइफ, एंडोमेंट, ULIP आदि)
यदि बीमारी पहले से मौजूद नहीं थी, तो दावा आमतौर पर सुरक्षित रहता है।
पूर्व-विद्यमान और बाद में होने वाली बीमारी में अंतर
पूर्व-विद्यमान बीमारी
- पॉलिसी लेने से पहले मौजूद थी
- इसे घोषित करना अनिवार्य है
- छिपाने पर दावा अस्वीकार हो सकता है
बाद में होने वाली बीमारी
- पॉलिसी जारी होने के बाद उत्पन्न हुई
- सामान्यतः मुख्य कवरेज पर असर नहीं डालती
भारतीय संदर्भ में उदाहरण
उदाहरण 1:
राहुल (आयु 35 वर्ष) ने ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस लिया।
दो साल बाद उसे हाई ब्लड प्रेशर का पता चला।
यदि बीमारी पहले से नहीं थी, तो उसकी पॉलिसी जारी रहेगी।
उदाहरण 2:
यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज थी और उसने यह जानकारी छिपाई, तो क्लेम के समय कंपनी दावा अस्वीकार कर सकती है।
प्रीमियम पर क्या असर पड़ता है?
भारत में अधिकांश टर्म प्लान:
- पूरी अवधि के लिए निश्चित प्रीमियम रखते हैं
- पॉलिसी अवधि के दौरान बीमारी आने पर प्रीमियम नहीं बढ़ता
- नवीनीकरण योग्य योजनाओं में भविष्य में जोखिम का पुनर्मूल्यांकन हो सकता है
जीवन बीमा योजनाओं की तुलना करें
सही समय पर सही जानकारी आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।